बुधवार, 23 मार्च 2011

कैसे कैसे मोड़ पर लाती हमे है जिंदगी.....

कैसे कैसे मोड़ पे लाती हमे है जिंदगी,
दो पल हंसाकर फिर रुलाती हमे है जिंदगी,

कभी सपने दिखाती है हमे पर्वतो से भी बड़े,
कभी गहरे अँधेरे में गिराती  हमे है जिंदगी..

देखना आँखों से न चाहो बुरा फिर भी मगर,
कई बुरे मंजर यहाँ दिखाती हमे है जिंदगी...

चाह कर कोई जहर की घूंट तो पिता नहीं,
पर समंदर विष भरा पिलाती हमे है जिंदगी..
जीना है तो सिख लो पाना यहाँ खोना यहाँ,
अक्सर ही ऐसे मोड़े पे लाती हमे है जिंदगी..
दुःख भरे कुछ सुख भरे अंदाज में ये हर कदम,
नित नयी सुर सरगमे सुनाती हमे है जिंदगी...
फिर भी जीते है आस में उम्मीद में कल की सभी,
कभी छीन ली तो  देती भी  खुसिया हमे है जिंदगी..

गर ये जिंदगी एक राह है काटों भरी फूलो भरी,
हर जख्म पे मरहम भी तो देती हमे है जिंदगी....



द्वारा,
अनुपम "अनमय"