देखते तो सब है, मगर समझता कौन है,
जानते तो सब है, मगर मानता कौन है,
मां बाप के हर एक आंसू का हिसाब होता है,
चुकाना होगा तुझको भी ये सच सुनता कौन है ।
तू भूल गया कि ऊपर बैठ कर नीचे के लोगों की ऐसी नीच हरकत देखने वाला भी कोई है, ऐ इंसान तू ये भी भूल गया कि सब यहीं भोग कर जाना है , जैसा करेगा वैसा पायेगा, जैसा सोचेगा वैसा ही मिलेगा, रुलाएगा तो तेरी हंसी भी छीन लेगा वो, उनको जगायेगा तो तेरी नींद भी ले लेगा वो, ठोकर मार कर क्या बच पायेगा ? तेरे पैरों से जमीन खींच ले जाएगा वो, भूख से तड़पाया तो रोटी तेरी भी छीन जाएगी- घर उनका छीना तो तेरा महल भी ढहा जाएगा वो ।
आज उम्र है जवानी है तो गलतफहमी मत रखना, अपनी जुबान अपनी हरकतों को खुला मत रखना ।
कुछ भी कहने से पहले मां बाप को ये सोच लेना जरूर की ऊपर वाले को हर शब्द सुनाई देता है, तेरा कोसना, तेरा डांटना, तेरा दुत्कारना, तेरा चिल्लाना सबका हिसाब होता है, तू यहां तो चेहरा अपना छिपा लेगा पर्दे में , लेकिन उसके सभा मे हर चेहरा बेनकाब होता है ।।
और अंत मे ……............
वक़्त गुजरेगा, तेरी उम्र भी ढल जाएगी,
तेरी करनी भी एक दिन तेरे सामने आएगी,
अच्छा तो और अच्छा, बुरा तो और बुरा,
कर्म जैसा वैसी ही कहानी बन जाएगी ।