सुनामी और भूकंप की वजह से जापान को जो आर्थिक छति पहुंची है उसका अंदाजा शायद लगा पाना आसान हो मगर जिस पर्यावरण जनित अस्थिरिता के दौर से वो और वहा के नागरिक गुजर रहे है उसका अंदाजा लगा पाना और उसके दर्द को समझ पाना शायद किसी के बस की बात नहीं है. वो सिर्फ वही महसूस कर सकता है जो उस दर्द से गुजर रहा है, फिर भी उनके दर्द और वहा के हालात को अपने शब्दों में बयां करने की कोशिश कर रहा हू उम्मीद है पसंद आएगी और अगर पसंद आये तो अपने विचारो को जरुर भेजे ...........
इन आँखों ने ये मंजर कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा...
जिन लहरों से जिंदगी थी वही मौत बन गयी,
इक पल में ही कई जिंदगी बेमौत मर गयी,
आशियाँ खंडहर बनते कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा...
पड़ी है चोटिल घायल कई मासूम जिंदगी,
हुई है अपनों के साये से महरूम जिंदगी,
चीखता रोता ये बचपन कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा....
कोई घायल कोई भूखा कोई लाचार है बैठा,
कोई इस मौत की आंधी में सबकुछ हार है बैठा,
ऐसी बेबसी ऐसा दर्द कभी पहले नहीं देखा ,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा.......
किसी का घर बिखर गया कोई घर से बिछड़ गया,
कुछ को धरती निगल गयी कुछ को सागर निगल गए,
हर तरफ मौत का मंजर कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा......
कभी आबाद ये शहर था बड़ी खुशहाल जिंदगी थी,
हर तरफ बिखरी हुई थी लाशें दो चार जिंदगी थी,
इतनी लाशो भरा शहर कभी पहले नहीं देखा ,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा.......
मौत से हर गयी लडती हुई हजारो जिंदगी,
अपने सामने अपनों की ख़तम होती जिंदगी,
ऐसा कहर क़ुदरत का कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा......
द्वारा लिखित,
अनुपम'अनमय'
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