किससे कहूँ व्यथा अपनी, मै नन्ही सी जान हूँ,
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ख़त्म करो ना कोख में मम्मी, मेरी नन्ही काया को,
पापा अपने दिल को टटोलो, ना मारो अपनी छाया को,
आने दो मुझको भी जग में, मै भी घर की शान हूँ,
किससे कहूँ व्यथा अपनी...................................
देख नहीं पाते हो पापा,कोख में मै भी बिलखती हूँ,
ख़त्म जब हमे तुम करते हो,मै भी बहुत तड़पती हूँ,
अपमान नहीं मै मम्मी पापा,भैया की तरह सम्मान हूँ,
किससे कहूँ व्यथा अपनी.......................................
इस छोटी सी अँधेरी दुनिया में,मै खुशी खुशी मंडराती हूँ,
जब क्रोध से कोई छुए मुझे तो, मै भी डर से घबराती हूँ,
बोझ नहीं हूँ मै तुम सब पे, मै भी एक नई विहान हूँ,
किससे कहू व्यथा अपनी..........................................
मै भी तो हसूंगी खेलूंगी, तुतला तुतला कर बोलूंगी,
मै भी पढ लिख कर मेहनत से, आपका हर दुःख झेलूंगी,
कभी झुकने ना दूंगी सर पापा, आपका मै अभिमान हूँ,
किससे कहू व्यथा अपनी..........................................
इक नन्ही गुड़िया हूँ मै, कभी देखो मेरी आँखों में,
मै भी चाहूँ की मुझको भी, भर लो अपनी बाहों में,
भैया वंश चलाने वाला , मै भी वंश की आन हूँ,
किससे कहूँ व्यथा अपनी, मै नन्ही सी जान हूँ,
मै बेटी हूँ सही मगर मै भी एक इन्सान
हूँ I
Written by : Anupam Singh

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