है आखिरी ये शाम तो ये शाम याद रखना,
अपनी यारी की दो चार दिन की याद साथ रखना..
हर लम्हा कोई खुश रहे ये है नहीं मुमकिन,
गम में भी यारो जीने का जज्बात साथ रखना..
गर मेरी वजह से कभी निकले हो तेरे आंसू तो ,
मेरा तुझसे लिपट के रोने की वो शाम याद रखना...
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ता जिंदगी यूँ तो साथ निभाना नहीं मुमकिन,
गुजरे हुए लम्हों की बस पहचान साथ रखना,
दूरियां कितनी भी हो हम आजायेंगे तुमसे मिलने,
बस आवाज में बुलाने का वो अंदाज साथ रखना...
भूल जाना मुझको पर एक आरजू है मेरी,
मेरे प्यार का वो पहला पैगाम याद रखना...
थे मिलके जो हासिल किये हमने कई मुकाम,
वो पल सही न सही वो मुकाम याद रखना...
मर के भी हर ख्वाहिस तेरी पूरी किया करेंगे,
हमने जो दी थी तुमको ये जुबान याद रखना.....
द्वारा लिखित,
अनुपम"अनमय"
superb anupam bhai... ye wali to greater noida me likhi thi na...
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