कुछ जज्बात अधूरे है कुछ बाते अधूरी है,
बिना उस चाँद के मेरी रातें अधूरी है....
दिल से दिए हो काटें तो फूल से लगते है,
जो दिल से नहीं दिए तो सौगातें अधूरी है..
महबूब अगर हो तो पतझड़ भी सावन है,
बिना महबूब के सावन की बरसातें अधूरी है,
ना कहा सको अगर दिल की बात जिससे चाहो,
तो सौ बार मिलके भी वो मुलाकातें अधूरी है....
द्वारा लिखित,
अनुपम "वास्तव"
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