बुधवार, 13 मई 2015

इतनी करुणा हमे दीजिये हे प्रभु

इतनी करुणा हमे दीजिये हे प्रभु,
हम दयावान हो जाये सबके लिए,
मन में छल ना कपट प्यार के गीत ही,
साथ गाये सभी मिलके सबके लिए.......
यूँ किसी आंख से आंसू गिरने न दे,
बाँट ले उसके गम हम सभी साथ में,
हार कर गर कोई जान देने लगे,
थाम ले हाथ उसका सभी हाथ में,
हर दया हर दुआ ना हो अपने लिए, मांग ले रब से खुशियाँ सभी के लिए,
इतनी करुणा हमे दीजिये हे प्रभु हम दयावान हो जाये सबके लिए....
थोड़ा थोड़ा सही दूसरों के लिए,
हम करे त्याग कोई दुखी ना रहे,
हम सभी एक संतान ईश्वर की है,
भाई भाई से यूँ बेरुखी ना रहे,
अपने आंसू तो सब पोछते है मगर हाथ सबके बढे सबके दुःख के लिए,
इतनी करुणा हमे दीजिये हे प्रभु हम दयावान हो जाये सबके लिए.......
अनुपम "वास्तव"

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

हमको तुम बदनाम ना समझो.............

हम अन्जान दिखते है हमें अन्जान ना समझो,
चुप हैं तो हमको तुम बदनाम ना समझो.......

बड़ी ख़ामोशी से हर एक राह को देखा है,
यू राहों पे भटकता हुआ इन्सान ना समझो......

इस उम्र में ही दुनिया की हकीकत समझ गया हूँ,
कोरे कागज की हमको कोई किताब ना समझो....

खामोश दरिया हूँ तो मत हंसों मेरी ख़ामोशी पर,
कितना राज छुपा है कोई तालाब ना समझो.....

आगाज होगा हमारा भी कभी वक़्त आने पर,
अभी वक़्त ठहरा है इसे अंजाम ना समझो....

जितने आंसू गिरे हमारे वो जाया नहीं होंगे,
इनमे धार है इसे पानी की धार ना समझो....

क्या हुआ जो कुछ पल हम दूर हो गए,
ये इंतिजार है इसको हमारी हार ना समझो....

कदम शेरों के ही हटते हैं पीछे शिकार से पहले,
हम खुद शिकारी है कोई शिकार ना समझो.....

अनुपम "वास्तव"

गुरुवार, 23 अप्रैल 2015

कैसी कैसी हैं ये आंखे ! Shayari in Hindi !


कहीं माँ की ममता की अलग संसार है आंखे,
कहीं भाई बहन के बीच की तकरार है आंखे,
कहीं रोती रुलाती हैं कहीं हंसती हंसाती हैं,
कहीं रिश्तों की कश्ती की बनी पतवार हैं आंखे.....

कहीं हर प्यार के शुरुआत की आगाज है आंखे,
इश्क खामोश है पर इश्क की आवाज है आंखे,
इश्क करते हैं जो पढ़ते वही इसके इशारों को,
जवां दो धड़कनों के प्यार की हमराज हैं ऑंखें.........

कहीं माँ बाप दोनों की थकी मजबूर हैं आंखे,
जिन्हें आँचल में पाला था उन्ही से दूर हैं आंखे,
रुलाते है उन्हें ही जो कभी हँसना सिखाते थे,
आज बेटों के जीवन की वही नासूर हैं आंखे......

कहीं तो मैकदे के जाम में मदहोश हैं आंखे,
कहीं होता गलत भी देखकर खामोश है आंखे,
कहीं पैसे कहीं ताकत के आगे झुक ये जाती हैं,
यूँ लगता है की जैसे हो चली बेहोश है आंखे........

कहीं हैवानियत से भर गयी हैवान है आंखे,
कहीं पे खून की प्यासी बनी शैतान है आंखे,
कहीं औरों के गम से गमजदा ये होके रोती हैं,
कहीं इन्सान की नियत की खुद पहचान हैं आंखे.........

अनुपम सिंह




मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

मैंने एक सपना देखा है एक ऐसा स्कूल बनाने का....

मैंने एक सपना देखा है एक ऐसा स्कूल बनाने का,
बच्चों के नन्हे हाथो से दीवारो को सजाने का....
जहां किताबों का कंधो पे कोई बोझ सताये ना,
हर बच्चे को प्यार मिले और कोई उन्हें रुलाये ना,
खुद ही रचे वो अपने सपने कापी के हर पन्नो पे,
हर कोई समझे उन सपनो को कोई उन्हें मिटाए ना....
स्कूल लगे उनको घर जैसा, घर जैसा सम्मान मिले,
डाट डपट ना मिले उन्हें और ना कोई अपमान मिले,
नन्हे नन्हे पंछी है ये स्कूल ना हो पिजड़ा इनका,
बिना डरे इनको उड़ने का थोड़ा ही सही आसमान मिले....
जहाँ रट-रट कर ना ज्ञान बढ़े ना पैसे से सम्मान बढ़े,
जहाँ करके सीखे हर बच्चा और हर बच्चे का मान बढ़े,
जहाँ खेल खेल में सब जीतें और कोई किसी से हारे ना,
जहाँ बच्चे के सपनो के घर को कोई कभी उजाड़े ना......
जहाँ रंग बिरंगे फूलों सा बचपन भी रंग रंगीला हो,
जहा बचपन का सुर सरगम सा सुन्दर और सुरीला हो,
जहाँ लिखे इबारत नई नई हर बचपन अपने हाथो से,
और उन हाथो से देश हमारा सुन्दर और सजीला हो......

द्वारा लिखित,

    अनुपम सिंह,
      (वास्तव)

शनिवार, 31 जनवरी 2015

आज भी...

क्या करू मजबूरियां कुछ कम नहीं है आज भी,
गर न होती तो सभी से खुल के मिलते आज भी....

जो भी सोचा एक सपना बन के जेहन में रहा,
उम्मीद बाकि है यही की कुछ तो होगा आज भी.....

कल भी कुछ अपना न था ना आज ही कुछ पास है,
बस विचारों के सहारे हम है जिन्दा आज भी.......

है देखने का बस नजरिया बदला बदला आपका,
एक वक़्त ही बदला है लेकिन हम वही आज भी....

सोचते है हम बहुत पर फर्क बस इतना सा है,
और तो कुछ कर गए हम सोचते है आज भी.....

यूँ तो भरते दोस्ती का दम सभी हर बात में,
जब वक़्त आया सब नदारद हो चले आज भी.....

दिन जो ग़ुरबत के शुरू थे वो अभी भी चल रहे,
हम कोशिशों पे कोशिशें करते मगर है आज भी....

दिन गुजरते जा रहे है उम्र ढलती जा रही,
बस एक दिल ही कल जवां था और जवां है आज भी...

ये दिल ही ऐसा है की धोखे खा के भी सुधरा नहीं,
मजबूर थे हम कल उसी से और बेबस आज भी.....

लाख जीवन है कठिन पर जिंदगी से आस है,
हे प्रभु तेरा सहारा कल भी था और आज भी.....

जिस दिल्लगी से हम कभी मिलते अपने यार से,
सबसे मिलते है उसी अंदाज में हम आज भी.....

बस समय बदला है थोडा बाद गयी मजबूरियां,
हम नहीं तो यार पक्के है सभी के आज भी......

हमे साथ किस्मत का मिला ना जिंदगी की राह में,
हम चले थे जिस जगह से हम वही है आज भी.....

हमे दर्द कितने भी मिले पर टूटना फितरत नहीं,
हम मुस्कुराते कल भी थे और मुस्कुराते आज भी...

जो एक रस्ते पर चले वो मंजिलों पर आ गए,
और हम रस्ते बदलते रह गए है आज भी.......

नेक निष्ठा और मेहनत के भरोसे चल रहा,
ये वक़्त बदलूँगा यही विस्वास खुद पर आज भी....

द्वारा लिखित:-

अनुपम सिंह

एक भारत श्रेष्ठ भारत ! Poems in Hindi !



एक भारत श्रेष्ठ भारत
अटूट भारत समृद्ध भारत
राग-द्वेष से मुक्त है हम,
युवा जोश से युक्त भारत,

है कृषि का देश भारत,
और ऋषि का देश भारत,
हर धर्म मजहब को समेटे,
विश्व गुरु है देश भारत...

ज्ञान और विज्ञान भारत,
भारतियों की शान भारत,
सम्मान और आदर सहित,
है सबको देता प्यार भारत...

एक देश से बढ़कर है भारत,
हम सभी की माँ है भारत,
दिल सभी के है अलग पर,
सबके दिल की जां है भारत....

विश्वाश से परिपूर्ण भारत,
ये मेरा अक्षूर्ण भारत,
हर दिशा में अग्रसर बन,
बढ़ रहा सम्पूर्ण भारत...........

द्वारा लिखित:- अनुपम सिंह



वंदेमातरम्

थकी थकी सी बूढी आंखे क्या कहती है सुनो कभी.....



थकी थकी सी बूढी आंखे क्या कहती है सुनो कभी,
उन आँखों से बहते आंसू क्या कहते है सुनो कभी......

उंगली पकड़ कर जिसे सिखाया चलना मुश्किल रहो पे,
जान निकल जाती थी जिन बच्चों की जरा सी आँहो पे,
उन कांपते हाथों की उम्मीदें क्या कहती है सुनो कभी,
थकी थकी सी बूढी आंखे.........................................
दर्द तुम्हे जब होता था माँ बाप के आंसू न रुकते,
तेरी खुशी के लिए वो अपना दर्द बयां भी ना करते,
अब दर्द में डूबे उन जिस्मों की आह जरा सी सुनो कभी,
थकी थकी सी ......................................................
कभी अकेला न छोड़ा सीने से लगाकर रखा जिसे,
तेरी हर जिद हर नादानी को हंस हंसकर सहा जिसे,
उनका भी अकेलापन उनकी भी जिद को पल भर सुनो कभी,
थकी थकी सी......................................................
कदम कदम पर खड़े रहे गिरने से तुम्हे बचाने को,
जाने क्या क्या जतन किये थे चलना तुम्हे सिखाने को,
लड़खड़ा रहे वही कदम उनकी भी आहट सुनो कभी,
थकी थकी सी............................................
रोते तुम थे बचपन में माँ बाप को चैन न मिलता था,
हसने तक तेरे उनका दिल फूट फूट कर रोता था,
आज अकेले वो रोते है उनका रोना सुनो कभी,
थकी थकी सी........................................
जिसने बोझ तुम्हारा ढोया हंस हंस करके थके बिना,
तेरे सपनो की खातिर हर बोझ उठाया रुके बिना,
बोझ न समझो उस तन को उस तन की पीड़ा सुनो कभी,
थकी थकी सी.......................................................
भूखे तुम्हे न सोने दिया न भूख से तुमको रोने दिया,
आज तुम्हारा वक़्त है तो उनको को क्यू भूखा रहने दिया,
खुद के भूख से रोने की आवाजे दिल से सुनो कभी,
थकी थकी सी....................................................
आज के बच्चों मत भूलों की कल वो वक़्त भी आएगा,
कल कंधे तेरे झुक जायेंगे तू भी बच न पायेगा,
श्रवण नहीं तो श्रवण के जैसे कुछ तो सेवा करो कभी,

थकी थकी सी.................................................. 

मै नन्ही सी जान हूँ ! Don't Kill baby Girls !



किससे कहूँ व्यथा अपनी, मै नन्ही सी जान हूँ,
मै बेटी हूँ सही मगर मै भी एक इन्सान हूँ I

ख़त्म करो ना कोख में मम्मी, मेरी नन्ही काया को,
पापा अपने दिल को टटोलो, ना मारो अपनी छाया को,
आने दो मुझको भी जग में, मै भी घर की शान हूँ,
किससे कहूँ व्यथा अपनी...................................

देख नहीं पाते हो पापा,कोख में मै भी बिलखती हूँ,
ख़त्म जब हमे तुम करते हो,मै भी बहुत तड़पती हूँ,
अपमान नहीं मै मम्मी पापा,भैया की तरह सम्मान हूँ,
किससे कहूँ व्यथा अपनी.......................................

इस छोटी सी अँधेरी दुनिया में,मै खुशी खुशी मंडराती हूँ,
जब क्रोध से कोई छुए मुझे तो, मै भी डर से घबराती हूँ,
बोझ नहीं हूँ मै तुम सब पे, मै भी एक नई विहान हूँ,
किससे कहू व्यथा अपनी..........................................

मै भी तो हसूंगी खेलूंगी, तुतला तुतला कर बोलूंगी,
मै भी पढ लिख कर मेहनत से, आपका हर दुःख झेलूंगी,
कभी झुकने ना दूंगी सर पापा, आपका मै अभिमान हूँ,
किससे कहू व्यथा अपनी..........................................

इक नन्ही गुड़िया हूँ मै, कभी देखो मेरी आँखों में,
मै भी चाहूँ की मुझको भी, भर लो अपनी बाहों में,
भैया वंश चलाने वाला , मै भी वंश की आन हूँ,

किससे कहूँ व्यथा अपनी, मै नन्ही सी जान हूँ,

मै बेटी हूँ सही मगर मै भी एक इन्सान हूँ I                                          Written by : Anupam Singh