मंगलवार, 22 मार्च 2011

अजनबी बनके मिलोगे तो अजनबी बन के मिलेंगे.......

बदल गए तुम इस बात का हम सिकवा न करेंगे,
अजनबी बनके मिलोगे तो अजनबी बनके मिलेंगे..

लाख रुसवा किया है तुमने फिर भी यकीं रखना,
प्यार से बात करोगे तो प्यार से बात करेंगे...

हम बैठे है उसी वक़्त के इंतिजार में अब तक,
की जब मुलाकात करोगे तो मुलाकात करेंगे..

खामोस हम तो रहेंगे तेरी बेवफाई पे य़ू ही,
जब सवालात  करोगे तो सवालात  करेंगे..

अभी ये अंत नहीं है मेरी वफ़ा का हमदम ,
आगाज तुमने लिखा था हम अंजाम लिखेंगे..

चले गए है बहुत दूर तेरे शहर से हम तो,
तुम बुला न सकोगे हम भी आ न सकेंगे..

द्वारा,
अनुपम सिंह"अनमय"