मंगलवार, 3 मई 2011

वक़्त के फैसले पे हर किसी को सर झुकाना है..........

किसी को हंस के पाना है किसी को रोके पाना है,
वक़्त के फैसले पे हर किसी को सर झुकाना  है.....

कोई कितनी भी कोसिस कर ले आने की या जाने की,
न खुद के बस में आना था न खुद के बस में जाना है......

जो खुस हो हम तो रोती है जो रोये तो ये हंसती है,
यही दस्तूर दुनिया का यही इसका फ़साना है..........

हर मोड़  पे लुटते गए किस्मत के हाथो हम,
कभी कोई बहाना था कभी कोई बहाना है..........

यहाँ तकदीर भी कैसे किसे मजबूर करती है,
किसी को रोशनी देने को घर खुद का जलाना है....

मझधार में चलती हुई कश्ती सी है ये जिंदगी,
कभी माझी डुबाता है कभी खुद डूब जाना है..... 
  

लेखक,
अनुपम"अनमय"

आह टूटे दिल की..........

मेरे सपनो को पल भर में न जाने क्यू जला डाला,
समझ  कर बेखबर सबने मेरा ही घर जला डाला...

न जाने क्या बिगाड़ा था यहाँ हमने ज़माने का,
मेरी खुशियों पे ही सबने यहाँ मातम मना डाला.....

कितनी कोसिसे कर ली बया हर दर्द करने की,
सुनी मेरी नहीं अपना ही सबने गम सुना डाला....

कभी गिरते न थे आंसू जहाँ मेरी निगाहों से,
उन्ही आँखों से आंसू खून के सबने बहा डाला....

मेरी आँखों को अश्को से रहे भरते सभी अपने,
जो बरसे हर घडी आँखों को वो सावन बना डाला...

ये परवाना रुका जब न कभी दुनिया के रोके से,
उसी के रंज में सबने शमा को ही बुझा डाला.......


लेखक,
अनुपम"अनमय"