गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

सन्नाटों के इस गुलशन में.......

सन्नाटो के इस गुलशन में,
हम रहने को मजबूर हुए,
कुछ ख्वाबों को सच करने को,
इस कंटक पथ के पथिक हुए....

है हममे साहस अनंत अटल,
की पर्वत में भी राह किये,
है जूझ रहे हम हर दुःख से,
साहस का अंनंत प्रवाह लिए...

करना है सबके सपनो को सच,
हों आंसू पर वो खुशी लिए,
हर चेहरा खिले कवल जैसा,
हर दिन आये नवरंग लिए...

है कठिन तपस्या की घड़िया,
असफलताओं का दुह्स्वप्न लिए,
पर संघर्षों की अनन्त कोशिसे,
पतझड़ में आएँगी बसंत लिए.....

लेखक,
अनुपम"अनमय"



और कहीं से तुम आ गये...........

सुना दिल था मेरा और कहीं से तुम आगये,
घर खाली था मेरा और कही से तुम आ गए..

दिल ने आवाज दी दिल को बड़ी खामोसी से,
हमने यद् किया और कही से तुम आ गए.....

हर खुसी मेरी जब मायूस कर चली थी हमें,
ये आंख नम हुई और कही से तुम आ गए....

जान निकले की उससे पहले तुम्हे देखना चाहा,
पलक झपकी ही थी और कही से तुम आ गए....

हर बैठे थे इश्क़ की बाजी जब दुनिया से,
सर झुकाए खड़े थे और कही से तुम आ गए....

हम भटक रहे थे अभी तक अकेले राहों पे,
हमसफ़र माँगा और कही से तुम आ गए...


लेखक,
अनुपम"अनमय" 

तुमसे एक बात कहना चाहता हु............

तुमसे एक बात कहना चाहता हु,
बस एक फरियाद करना चाहता हु,
न कह सके तो मर जायेंगे हम,
इससे पहले मुलाकात करना चाहता हु....

पल भर ही सही आज जी भर लेकिन,
होके अपना सही आज अजनबी लेकिन,
आखिरी बार तेरे साथ होना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु........

किसी के दिल में खुद को कभी बसने न दिया,
रहा तनहा मगर ये दिल कहीं खोने न दिया,
तेरा ये दिल है तुझ्हे आज देना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु.......

खामोश लब थे जब से दूर हो गए थे हम,
जो भी कहते थे सिर्फ तुझसे ही कहते थे हम,
लबों को फिर वही आवाज देना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु.....

कह ले चाहे तू जो भी आज कहना चाहे,
बड़े दिनों के बाद दिल ये आज रोना चाहे,
तेरे पहलु में आखिरी बार रोना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु......

दूर हो कल को हम आज उससे पहले ही,
पहन ले सर पे कफ़न आज उससे पहले ही,
गोद में तेरी एक पल को सोना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु.....

मेरी आँखों ने दिखाए थे कुछ हंसीं सपने,
जो हकीकत न हुए बनके रह गए सपने,
उन्हें आखिरी पल ही सही साथ जीना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु.........

ये आसमान एक था हम ही दूर दूर रहे,
किसी पिजड़े में बंद पंछी से मजबूर रहे,
हर बंधन को आज तोड़ आना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु...

पंख थे, तेरे बगैर मगर उड़ न सके,
आसमा से गिरे पंक्षी की  तरह उड़ न सके,
आज आखिरी बार तेरे साथ उड़ना चाहता हु,
तुमसे एक बात कहना चाहता हु.........


लेखक,
अनुपम"अनमय"