गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

सन्नाटों के इस गुलशन में.......

सन्नाटो के इस गुलशन में,
हम रहने को मजबूर हुए,
कुछ ख्वाबों को सच करने को,
इस कंटक पथ के पथिक हुए....

है हममे साहस अनंत अटल,
की पर्वत में भी राह किये,
है जूझ रहे हम हर दुःख से,
साहस का अंनंत प्रवाह लिए...

करना है सबके सपनो को सच,
हों आंसू पर वो खुशी लिए,
हर चेहरा खिले कवल जैसा,
हर दिन आये नवरंग लिए...

है कठिन तपस्या की घड़िया,
असफलताओं का दुह्स्वप्न लिए,
पर संघर्षों की अनन्त कोशिसे,
पतझड़ में आएँगी बसंत लिए.....

लेखक,
अनुपम"अनमय"



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