रविवार, 27 मार्च 2011

गलगोटिया कॉलेज :- यादों के रंग दोस्तों के संग.......

अपने सारे दोस्तों के नाम से इस कविता की रचना की है उस समय जब गलगोटिया में हम सब साथ थे, सुरुआती दौर था वो मेरे लिखने का इसलिए कुछ खामिया नजर आ सकती है मगर  मैंने इसके बावजूद इसमें कोई बदलाव नहीं किया जैसी लिखा था वैसी ही यहाँ पेश कर रहा हू.....
उम्मीद है मेरे दोस्तों को अच्छी लगेगी....


हम सब अनुपम है इस जग में ईस्वर के रचित है हम सारे,
ये गौरव है हम मिले यहाँ एक दूजे के हम सब प्यारे....

आसमान में सबके प्यारे है रवि सुधाकर दो तारे,
भावना ही एक डोर है जिससे जुड़े प्यार के बंधन सारे,

अमित रहेगी छाप हमारी, ये दुनिया देखेगी सारी,
अभिजीत बनके लहरायेंगे जब आएगी अपनी बारी....

अर्पण कर देना सबकुछ तुम गर दुखी हो अपना यार कोई,
गले लगाना अनुज समझ  जब हारे अपना यार कोई......

अभिनव रचना इश्वर की हम, है पंकज सी पहचान लिए,
एक दूजे के आये कम सदा है दिल में ये अरमान लिए....

डरने की कोई बात नहीं हर गुण के है सब इन्द्र यहाँ,
सत्य,तेज,धर्मं और ध्रुव है देवो के देवेन्द्र यहाँ........

अर्जुन से एकाग्र हम ,है लक्ष्य में अपने सब  प्रवीण,
हम सब अनूप अपने गुण में हर पल करते है कुछ  नवीन ..... 

है लोकपति श्रीकांत जब महफिल की शोभा बड़ा रहे,
तो स्वर्ग के सारे देव भी अपने गीत विजय के गा रहे....

रंग बिरंगे फूल है हम जिससे है बनी एक सुंदर माला,
खुसबू से हमारी महकेगा, आगे एक एक पल आने वाला....

न भूलेंगे ये गुजरे पल वो हंसी ठिठोली की घड़ियाँ ,
अपने अंदर के भावित भाव से हम जुड़े रहेंगे बन कड़ियाँ....

काटो से भरी हो राह मगर अनिरुध बने तुम चलते  रहो,
शारिक होंगे एक दिन हमसब,बस शमा बनके तुम जलते रहो......


द्वारा,
अनुपम'अनमय'
   




दर्द दिल की शायरी अब हो गयी हम क्या करें.....

बैठे बैठे एक कहानी लिख गयी हम क्या करे,
दर्द दिल का शायरी अब बन गयी हम क्या करे....

हमने रोका खुद को दिल के खेल से हर पल मगर,
उनकी एक आवाज पे दिल खो गया हम क्या करे..

हम जानते थे  प्यार की ये राह है काटों भरी,
प्यार का इस दिल में काटा चुभ गया हम क्या करे..

इस कदर आदत लगी है उनसे पल पल मिलने की,
उनके बिना अब बोझ्ह सी है जिंदगी हम क्या करे...

मौसमे बरसात में दिल इस कदर पागल  हुआ,
हम भीगे उनकी यादो की बरसात में हम क्या करे...

उनतक पहुचने में कई थे मौत के पहरे खड़े,
पर उनकी एक आवाज पे हम चल दिए हम क्या करे....


द्वारा लिखित ,
अनुपम'अनमय'




सुनामी:- डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा.....

सुनामी  और भूकंप की वजह से जापान को जो आर्थिक छति पहुंची है उसका अंदाजा शायद लगा पाना आसान हो मगर जिस पर्यावरण जनित  अस्थिरिता के दौर से वो और वहा  के नागरिक गुजर रहे है उसका अंदाजा लगा पाना और उसके दर्द को समझ  पाना शायद  किसी  के बस की बात नहीं है. वो सिर्फ वही महसूस कर सकता है जो उस दर्द से गुजर रहा है, फिर भी उनके दर्द और वहा के हालात को अपने शब्दों  में बयां  करने की कोशिश कर रहा हू उम्मीद है पसंद आएगी और अगर  पसंद आये तो अपने  विचारो  को जरुर भेजे ...........

 इन आँखों ने ये मंजर कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा...

जिन लहरों से जिंदगी थी वही मौत बन गयी,
इक पल में ही कई जिंदगी बेमौत मर गयी,
आशियाँ खंडहर बनते कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा...

पड़ी है चोटिल घायल कई मासूम जिंदगी,
हुई है अपनों के साये से महरूम जिंदगी,
चीखता रोता ये बचपन कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा....

कोई घायल कोई भूखा कोई लाचार है बैठा,
कोई इस मौत की आंधी में सबकुछ हार है बैठा,
ऐसी बेबसी ऐसा  दर्द कभी पहले नहीं देखा ,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा.......

किसी का घर बिखर गया कोई घर से बिछड़ गया,
कुछ को धरती निगल गयी कुछ को सागर निगल गए,
हर तरफ मौत का मंजर कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा......

कभी आबाद ये शहर था बड़ी खुशहाल जिंदगी थी,
हर तरफ बिखरी हुई थी लाशें दो चार जिंदगी थी,
इतनी लाशो भरा शहर कभी पहले नहीं देखा ,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा.......

मौत से हर गयी लडती हुई हजारो जिंदगी,
अपने सामने अपनों की ख़तम होती जिंदगी,
ऐसा कहर क़ुदरत का कभी पहले नहीं देखा,
डूबते शहर का शहर कभी पहले नहीं देखा......


द्वारा लिखित,
अनुपम'अनमय'