रविवार, 27 मार्च 2011

दर्द दिल की शायरी अब हो गयी हम क्या करें.....

बैठे बैठे एक कहानी लिख गयी हम क्या करे,
दर्द दिल का शायरी अब बन गयी हम क्या करे....

हमने रोका खुद को दिल के खेल से हर पल मगर,
उनकी एक आवाज पे दिल खो गया हम क्या करे..

हम जानते थे  प्यार की ये राह है काटों भरी,
प्यार का इस दिल में काटा चुभ गया हम क्या करे..

इस कदर आदत लगी है उनसे पल पल मिलने की,
उनके बिना अब बोझ्ह सी है जिंदगी हम क्या करे...

मौसमे बरसात में दिल इस कदर पागल  हुआ,
हम भीगे उनकी यादो की बरसात में हम क्या करे...

उनतक पहुचने में कई थे मौत के पहरे खड़े,
पर उनकी एक आवाज पे हम चल दिए हम क्या करे....


द्वारा लिखित ,
अनुपम'अनमय'




2 टिप्‍पणियां:

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