कैसे जिये आज जीना है मुश्किल,
जहर जिंदगी का पीना है मुश्किल.....
हमसे तुम्हे और तुमसे हमे,
आज के वक़्त मिलना मिलाना है मुश्किल...
अब वादे वफ़ा की है बातें पुरानी,
है करते सभी पर निभाना है मुश्किल....
लगाने को सब ही लगा देते है पर,
लगी आग लेकिन बुझाना है मुश्किल....
आंखों में आंसू तो देते सभी है,
पर रोते हुए को हंसाना है मुश्किल....
ये दिल ही तो है सब पे आ जाता है,
पर दिल की लगी को जताना है मुश्किल....
साथी है गर साथ मुश्किल नही कुछ,
जिंदगी हमसफ़र बिन बिताना है मुश्किल....
किया पाप तो अब क रोये है बंदे,
करम की गति को मिटाना है मुश्किल....
गिर गए चलते चलते तो उठ जाओगे,
पर नजर से गिरे तो उठाना है मुश्किल....
जलाये रखो जो उम्मीदों की लौ है,
बुझी लौ को फिर से जलाना है मुश्किल.....
जो चले जाते है दूर दिल से कहीं,
चाह कर भी उन्हें फिर बुलाना है मुश्किल....
जख्म यादों के कितने पुराने ही हो,
वक़्त के साथ फिर भी भुलाना है मुश्किल....
आज कल प्यार बस एक हंसी खेल है,
हीर रांझा सा कोई दीवाना है मुश्किल....
गर रुलाया किसी को तो रोना पड़ेगा,
वक़्त के हाथ से बच के जाना है मुश्किल....
उजाड़ा है घर गर किसी का तो सुन लो,
खुद का महल फिर बचाना है मुश्किल....
