गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

इशारों ही इशारों में.......

प्यार तो कर लिया हमने इशारो ही इशारो में,
कहा तुमने सुना हमने इशारो ही इशारो में :

खामोश लउब थे अभी तक जो बात कहने में,
हवा ने बात कहा दी वो इशारो ही इशारो में :

नजर के तीर से जालिम की ऐसे हो गए घायल,
की निकला दिल हथेली पे इशारो ही इशारो में:

चन्द कदमो की दुरी पे खड़े थे जाके वो हमसे,
ये धड़कन बढ़ रही थी पर इशारो ही इशारो में:

होठ उनके हिले फिर बात पहुंची दिल में जब मेरे,
तो दिल पागल हुआ मेरा इशारो ही इशारो में :

हम जिस दर्द को होठो से बयां कर नहीं पाए ,
ये लाली आंख की कहा दी इशारो ही इशारो में :

ऐसे खो गए थे हम जरा उनकी निगाहों में ,
ढली ये शाम भी ऐसे इशारो ही इशारो में :

रहेंगे साथ जन्मो तक तेरी बाहों में ऐ हरदम,
ये वादे कर लिए हमने इशारो ही इशारो में:

सुना था जिस नशे की बात हमने इस ज़माने में,
पिला दी वो निगाहों से इशारो ही इशारो में.......

अनुपम "वास्तव"





1 टिप्पणी:

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