दूर इतना हो गया हूँ अब पास आना चाहता हूँ ,
गोद में सर रख के माँ की फिर से सोना चाहता हूँ.....
एक वक़्त था हर दर्द अपना माँ से कह रोते थे हम ,
आज फिर हर दर्द माँ से कह के रोना चाहता हूँ....
पेट भर हर चीज खाई फिर भी भूखा रह गया,
अब दूध रोटी माँ के हाथो फिर से खाना चाहता हूँ.....
खो गया हूँ इस kadar दुनिया के इस बाजार में,
अब माँ के आंचल में ही खुद को फिर से खोना चाहता हूँ....
दूर जाकर पाया सबकुछ पर खोया माँ का प्यार,
माँ की खोई है जो ममता फिर से पाना चाहता हूँ.......
खो दिए जो पल थे सारे बीते माँ की गोद में,
माँ के संग बचपन वही अब फिर से जीना चाहता हूँ......
जिसने मेरी खुशियों के लिए हर दर्द हंस के सह लिया,
अब दर्द माँ का लेके खुसिया फिर से देना चाहता हूँ......
द्वारा लिखित,
अनुपम"अनमय"
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