प्यार तो कर लिया हमने इशारो ही इशारो में,
कहा तुमने सुना हमने इशारो ही इशारो में :
खामोश लउब थे अभी तक जो बात कहने में,
हवा ने बात कहा दी वो इशारो ही इशारो में :
नजर के तीर से जालिम की ऐसे हो गए घायल,
की निकला दिल हथेली पे इशारो ही इशारो में:
चन्द कदमो की दुरी पे खड़े थे जाके वो हमसे,
ये धड़कन बढ़ रही थी पर इशारो ही इशारो में:
होठ उनके हिले फिर बात पहुंची दिल में जब मेरे,
तो दिल पागल हुआ मेरा इशारो ही इशारो में :
हम जिस दर्द को होठो से बयां कर नहीं पाए ,
ये लाली आंख की कहा दी इशारो ही इशारो में :
ऐसे खो गए थे हम जरा उनकी निगाहों में ,
ढली ये शाम भी ऐसे इशारो ही इशारो में :
रहेंगे साथ जन्मो तक तेरी बाहों में ऐ हरदम,
ये वादे कर लिए हमने इशारो ही इशारो में:
सुना था जिस नशे की बात हमने इस ज़माने में,
पिला दी वो निगाहों से इशारो ही इशारो में.......
अनुपम "वास्तव"
कहा तुमने सुना हमने इशारो ही इशारो में :
खामोश लउब थे अभी तक जो बात कहने में,
हवा ने बात कहा दी वो इशारो ही इशारो में :
नजर के तीर से जालिम की ऐसे हो गए घायल,
की निकला दिल हथेली पे इशारो ही इशारो में:
चन्द कदमो की दुरी पे खड़े थे जाके वो हमसे,
ये धड़कन बढ़ रही थी पर इशारो ही इशारो में:
होठ उनके हिले फिर बात पहुंची दिल में जब मेरे,
तो दिल पागल हुआ मेरा इशारो ही इशारो में :
हम जिस दर्द को होठो से बयां कर नहीं पाए ,
ये लाली आंख की कहा दी इशारो ही इशारो में :
ऐसे खो गए थे हम जरा उनकी निगाहों में ,
ढली ये शाम भी ऐसे इशारो ही इशारो में :
रहेंगे साथ जन्मो तक तेरी बाहों में ऐ हरदम,
ये वादे कर लिए हमने इशारो ही इशारो में:
सुना था जिस नशे की बात हमने इस ज़माने में,
पिला दी वो निगाहों से इशारो ही इशारो में.......
अनुपम "वास्तव"