दर्द रोज ही होता है पर दिखता कभी कभी है,
आंसू छुपाना चाहा पर छुपता कभी कभी है....
कितनी भी करलो कोसिस हर चीज नहीं मिलती,
तुम चाहे जितना मांगो वो मिलता कभी कभी है.....
हर दर पे गए रब की शायद वो सुन ले मेरी,
पर अब ये जान पाया की वो सुनता कभी कभी है.....
जिन्हें प्यार है किसी से वो हर रोज ही जलते है,
नफरत जिन्हें है उनका दिल जलता कभी कभी है....
अक्सर ही फूल मिलते है यहाँ प्यार में सभी को,
पर काटें मिले तो कोई चलता कभी कभी है.......
यूं लाखो हसीन चेहरे है दुनिया में देखने को,
पर आँखों में कोई चेहरा बसता कभी कभी है...
इन यारो को क्या बताऊ की दिल पे क्या गुजरी है,
इतने मिले है गम की ये दिल हँसता कभी कभी है......
अक्सर ही फूल पैरो से कुचले हुए देखे है,
अब पन्नो में फूल कोई रखता कभी कभी है.....
आज पल भर किसी का कोई इंतजार नहीं करता,
रस्ते पे अब निगाहे कोई रखता कभी कभी है......
लेखक,
अनुपम"अनमय"