शुक्रवार, 13 मई 2011

सबने खेला दिल से मेरे एक खिलौने की तरह.....

सबने खेला दिल से मेरे एक खिलौने की तरह,
हर किसी ने आजमाया एक खिलौने की तरह.....

जिसको जब तक प्यार आया साथ में लेकर चला,
फिर किसी कोने में छोड़ा एक खिलौने की तरह.....

जिसको जब हसरत हुई  चाभी भरी मै चल दिया,
और फिर खाया हू ठोकर एक खिलौने की तरह...

जब तलक सबको हंसाया आँख का तारा रहा,
फिर सजाया कांच में एक खिलौने की तरह....

अपने अपने शौक से सबने किये टुकड़े मेरे,
फिर तोड़  कर बिखरा दिया एक खिलौने की तरह....

आँख में आंसू छिपा कर दर्द दिल में रख लिया,
और फिर हँसता रहा हू एक खिलौने की तरह.....

अपनी नहीं कोई खुसी अपना नहीं कोई भी गम,
मै सबकी बस सुनता रहा हू एक खिलौने की तरह.....


लेखक
अनुपम"अनमय"


आंसू है पानी और मोती है पैसा.....

हर रिश्ते पे आज बड़ा भरी है पैसा,
आंसू है पानी और मोती हुआ है पैसा..

मैयत पे आंसू की ना कीमत है तेरे,
जब तक की तेरे हाथो ना गिरता है पैसा...

कोई अपना है या पराया ये पैसा बोलता है,
यहाँ खून के रिस्तो पे भरी हुआ है पैसा.....

अंधे बने रहेंगे किसी बेबस की मौत पर ये,
हुई है जान सस्ती और महंगा हुआ है पैसा...

रातो की नींद पैसा दिल का सुकून पैसा,
आँखों की रौशनी भी सबके हुआ है पैसा...

यहाँ मिलती है सेवा अगर  दिखता है पैसा,
रिश्ता नहीं है कुछ भी सबकुछ हुआ है पैसा...

यहाँ रिस्तो को खिड़की से बाहर यू फेकते है,
घर में जब रिस्तो से प्यारा हुआ है पैसा...

कोई अपना चला जाये आंसू नहीं बहाते,
रोते है सब तब जब जाता है पैसा...

ना बीवी ना बच्चा ना कोई घर है अपना ,
दिन रात सुबह शाम बस साथी हुआ है पैसा......

लेखक,
अनुपम"अनमय"