शुक्रवार, 13 मई 2011

सबने खेला दिल से मेरे एक खिलौने की तरह.....

सबने खेला दिल से मेरे एक खिलौने की तरह,
हर किसी ने आजमाया एक खिलौने की तरह.....

जिसको जब तक प्यार आया साथ में लेकर चला,
फिर किसी कोने में छोड़ा एक खिलौने की तरह.....

जिसको जब हसरत हुई  चाभी भरी मै चल दिया,
और फिर खाया हू ठोकर एक खिलौने की तरह...

जब तलक सबको हंसाया आँख का तारा रहा,
फिर सजाया कांच में एक खिलौने की तरह....

अपने अपने शौक से सबने किये टुकड़े मेरे,
फिर तोड़  कर बिखरा दिया एक खिलौने की तरह....

आँख में आंसू छिपा कर दर्द दिल में रख लिया,
और फिर हँसता रहा हू एक खिलौने की तरह.....

अपनी नहीं कोई खुसी अपना नहीं कोई भी गम,
मै सबकी बस सुनता रहा हू एक खिलौने की तरह.....


लेखक
अनुपम"अनमय"


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dear readers pls share your comments about the post, your feedback will improve my writing.....