सुना दिल था मेरा और कहीं से तुम आगये,
घर खाली था मेरा और कही से तुम आ गए..
दिल ने आवाज दी दिल को बड़ी खामोसी से,
हमने यद् किया और कही से तुम आ गए.....
हर खुसी मेरी जब मायूस कर चली थी हमें,
ये आंख नम हुई और कही से तुम आ गए....
जान निकले की उससे पहले तुम्हे देखना चाहा,
पलक झपकी ही थी और कही से तुम आ गए....
हर बैठे थे इश्क़ की बाजी जब दुनिया से,
सर झुकाए खड़े थे और कही से तुम आ गए....
हम भटक रहे थे अभी तक अकेले राहों पे,
हमसफ़र माँगा और कही से तुम आ गए...
लेखक,
अनुपम"अनमय"
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