थकी थकी सी बूढी आंखे क्या कहती है
सुनो कभी,
उन आँखों से बहते आंसू क्या कहते है
सुनो कभी......
उंगली पकड़ कर जिसे सिखाया चलना
मुश्किल रहो पे,
जान निकल जाती थी जिन बच्चों की जरा
सी आँहो पे,
उन कांपते हाथों की उम्मीदें क्या कहती
है सुनो कभी,
थकी थकी सी बूढी
आंखे.........................................
दर्द तुम्हे जब होता था माँ बाप के
आंसू न रुकते,
तेरी खुशी के लिए वो अपना दर्द बयां
भी ना करते,
अब दर्द में डूबे उन जिस्मों की आह
जरा सी सुनो कभी,
थकी थकी सी ......................................................
कभी अकेला न छोड़ा सीने से लगाकर रखा
जिसे,
तेरी हर जिद हर नादानी को हंस हंसकर
सहा जिसे,
उनका भी अकेलापन उनकी भी जिद को पल भर
सुनो कभी,
थकी थकी
सी......................................................
कदम कदम पर खड़े रहे गिरने से तुम्हे
बचाने को,
जाने क्या क्या जतन किये थे चलना
तुम्हे सिखाने को,
लड़खड़ा रहे वही कदम उनकी भी आहट सुनो
कभी,
थकी थकी
सी............................................
रोते तुम थे बचपन में माँ बाप को चैन
न मिलता था,
हसने तक तेरे उनका दिल फूट फूट कर
रोता था,
आज अकेले वो रोते है उनका रोना सुनो
कभी,
थकी थकी
सी........................................
जिसने बोझ तुम्हारा ढोया हंस हंस करके
थके बिना,
तेरे सपनो की खातिर हर बोझ उठाया रुके
बिना,
बोझ न समझो उस तन को उस तन की पीड़ा
सुनो कभी,
थकी थकी सी.......................................................
भूखे तुम्हे न सोने दिया न भूख से
तुमको रोने दिया,
आज तुम्हारा वक़्त है तो उनको को क्यू
भूखा रहने दिया,
खुद के भूख से रोने की आवाजे दिल से
सुनो कभी,
थकी थकी
सी....................................................
आज के बच्चों मत भूलों की कल वो वक़्त
भी आएगा,
कल कंधे तेरे झुक जायेंगे तू भी बच न
पायेगा,
श्रवण नहीं तो श्रवण के जैसे कुछ तो
सेवा करो कभी,
थकी थकी
सी..................................................

Mast
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