शनिवार, 31 जनवरी 2015

आज भी...

क्या करू मजबूरियां कुछ कम नहीं है आज भी,
गर न होती तो सभी से खुल के मिलते आज भी....

जो भी सोचा एक सपना बन के जेहन में रहा,
उम्मीद बाकि है यही की कुछ तो होगा आज भी.....

कल भी कुछ अपना न था ना आज ही कुछ पास है,
बस विचारों के सहारे हम है जिन्दा आज भी.......

है देखने का बस नजरिया बदला बदला आपका,
एक वक़्त ही बदला है लेकिन हम वही आज भी....

सोचते है हम बहुत पर फर्क बस इतना सा है,
और तो कुछ कर गए हम सोचते है आज भी.....

यूँ तो भरते दोस्ती का दम सभी हर बात में,
जब वक़्त आया सब नदारद हो चले आज भी.....

दिन जो ग़ुरबत के शुरू थे वो अभी भी चल रहे,
हम कोशिशों पे कोशिशें करते मगर है आज भी....

दिन गुजरते जा रहे है उम्र ढलती जा रही,
बस एक दिल ही कल जवां था और जवां है आज भी...

ये दिल ही ऐसा है की धोखे खा के भी सुधरा नहीं,
मजबूर थे हम कल उसी से और बेबस आज भी.....

लाख जीवन है कठिन पर जिंदगी से आस है,
हे प्रभु तेरा सहारा कल भी था और आज भी.....

जिस दिल्लगी से हम कभी मिलते अपने यार से,
सबसे मिलते है उसी अंदाज में हम आज भी.....

बस समय बदला है थोडा बाद गयी मजबूरियां,
हम नहीं तो यार पक्के है सभी के आज भी......

हमे साथ किस्मत का मिला ना जिंदगी की राह में,
हम चले थे जिस जगह से हम वही है आज भी.....

हमे दर्द कितने भी मिले पर टूटना फितरत नहीं,
हम मुस्कुराते कल भी थे और मुस्कुराते आज भी...

जो एक रस्ते पर चले वो मंजिलों पर आ गए,
और हम रस्ते बदलते रह गए है आज भी.......

नेक निष्ठा और मेहनत के भरोसे चल रहा,
ये वक़्त बदलूँगा यही विस्वास खुद पर आज भी....

द्वारा लिखित:-

अनुपम सिंह

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